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आइए,“लाल नौका भावना”को आगे ले लें


29 November 2017 | By hiadmin | SISU

उन्नीस नवंबर को शंघाई अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय के अध्यापकों और विद्यार्थियों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी(सीपीसी) की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस की साइट, नान झील मेमोरियल हॉल और नान झील पार्क का दौरा किया।

हम मेमोरियल संग्रहालय में दिखाई गई पुरानी वस्तुओं को देखते रहे, साथ ही संग्रहालय की गाइड हमें इनके पीछे की कथाएं सुनाती रहीं और 96 साल पहले के दृश्य एक एक करके नज़र आते रहे। २३ जुलाई १९२१ को माओ त्सतूङ और उनके 12 साथी तथा कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के प्रतिनिधियों ने शंघाई की शिखमेन शैली की इमारत के एक छोटे से कमरे में(नं106, वांग ची रोड पर) सीपीसी की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस में भाग लिया और सीपीसी की नींव डाल दी। बैठक ३० जुलाई तक चलती रही। तब फ्रेंच कंसेशन एरिया की पुलिस को बैठक की जानकारी मिली और इस गुप्त बैठक का स्थान बदला जाना पड़ा। कांग्रेस के प्रतिनिधि ली ता की पत्नी श्रीमती वांग हुईवू की सहायता से ३१ जुलाई को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस के १२ प्रतिनिधियों ने चिआशिंग की नान झील जाकर एक नाव पर बैठक जारी रखी।

चीन के आधुनिक इतिहास के सबसे अंधेरे दौर में अत्याचारी शासकों और साम्राज्यवादी शक्तियों के समक्ष इन १३ नौजवानों ने समाजिक परिवर्तन लाने के लिए आंदोलन शुरू करने और चीन को अत्याचारी शासकों और साम्राज्यवादियों की जकड़ से छुटाने की घोषणा की। इस बैठक में इन महान पुरुषों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान का निर्माण किया और देश व जनता को बचाने का लक्ष्य तय किया। १३ प्रतिनिधियों से स्थापित सीपीसी ने पिछले ९६ सालों में ढेर सारी कठिनाइयों का सामना करके एक के बाद दूसरी शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। इसी पार्टी के नेतृत्व में चीनी जनता ने जापानी आक्रमण को पराजित किया, क्वोमिनतांङ पार्टी के प्रतिक्रियात्मक शासन को उखाड़ फेंका और नया चीन स्थापित किया। और आज चीनी जनता सीपीसी के नेतृत्व में चीनी राष्ट्र के महान कायाकल्प का चीनी सपना साकार करने की राह पर चल रही है। यह कितना महान कार्य है ! संग्रहालय में चलते हुए इस बात की जड़ मेरे मन में जम गई कि केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ही चीन को बचा सकती है। यह पार्टी, जो शुरुआत में १३ लोगों से निर्मित थी, अब एक 8 करोड़ 90 लाख सदस्यों का बड़ा राजनीतिक दल बन गई है। मुझे इस पार्टी की एक सदस्य होने पर गर्व है।

दोपहर के बाद हमने नान झील पार्क जाकर उसी नौका की प्रतिकृति के दर्शन किए, जिसपर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस की अंतिम दिन की बैठक हुई। यह नौका अब “लाल नौका” कहलाता है, जो सृजनात्मकता, दृढ़ विश्वास और समर्पण-भावना का प्रतीक बन गई है।

भारत को जानने, चीन-भारत संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काम करने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अपना योगदान देने के कामों में सृजनात्मता आदि गुणों की बड़ी आवश्यकता है। और सृजनात्मकता का आधार संबंधित जानकारियां होता है। हिंदी विद्यार्थी के नाते एमए के पहले साल में मैं अवश्य भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य पूरा मन लगाकर पढ़ती रहूँगी, ताकि भारतीय संस्कृति को बेहतर समझ सकूँ। इसके अतिरिक्त चीनी संस्कृति का अध्ययन भी अनिवार्य है, ताकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के काम में योग्य दूत बन सकूँ।

मैं इस कथन से कि प्रत्येक पार्टी सदस्य को जनता के लिए अनुकरणीय नमूना होना चाहिए, बहुत प्रभावित हूँ। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में मैं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास और संविधान को ध्यान से पढ़ती रहूँगी, दैनिक जीवन में अपने सदाचरण से दूसरों को प्रभावित करती रहूँगी और “लाल नौका भावना” को आगे ले लूँगी।(इंदु/Gu Qingzi)

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