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भारत की एंटर्टेनमेंट


02 April 2021 | By hiadmin | SISU

चलिए देखते हैं कैसे भारत की एंटर्टेनमेंट की सब इंडस्ट्री विकास करती।

इंडिया के मॉडर्न कामडी की पॉप्युलैरिटी की जो जर्नी है वो इंटर्नेट की पॉप्युलैरिटी की जर्नी से काफ़ी मिलती-जुलती है। २००७-२००८ में भारत का स्टैंडप कॉमडी की शुरुआत थी। दो हज़ार सात आठ वही साल था, जहां यूटूब इंडिया में प्रचलित होना बस शुरू हुआ था। तब तक Russel Peters के स्टैंडप क्लिप्स ही वाइरस हो चुके थे। Russel Peters हमारे अक्षय कुमार की तरह विरासत से इंडीयन हैं, लेकिन उनका पासपोर्ट कनेडीयन हैं। उनके कॉमडी में इंडिया के और इंडिया के लोगों की कहानियाँ काफ़ी हैं। इसीलिए वो इंडिया के लोगों के लिए काफ़ी रेलेटबल।जो इनिशल ऑडीयन्स स्टैंडप कॉमडी देखते हैं इस ऑडीयन्स के पास इंटर्नेट था, ये अमेरिका की कल्चर और टीवी शोज़ से काफ़ी प्रभावित थे, और वो ऑडीयन्स जोक्स को "veg" और "non-veg" के बीच में बाँटती नहीं। इस वजह से इस नए रूप की कॉमडी जो क्रॉस-ड्रेसिंग और मिमिक्री थोड़ा आगे जाती हो, वैसी कॉमडी की जगहें बन गयी।

शुरू शुरू के दौर की ख़ासियत यह थी कि ये सारे नए शोज़ में पर्फ़ोर्म करनेवाले लोग बड़े पढ़े-लिखे लोग थे, MNCs में काम करने वाले लोग थे, ये लोग कैफ़े में जाना पसंत करते थे। वैसे कैफ़ेज़ में कॉफ़ी भी पाँच सौ रुपए की होती है। इसी कारण से तब ज़्यादातर कॉमडी इस समय में अंग्रेज़ी में होती थी। फिर भी अंग्रेज़ी कॉमडी तब के टाइम पर टीवी पर मिलने वाली कॉमडी से "एवोव्त" मानी जाती थी, क्योंकि टीवी पर बहुत सेन्सर्शिप होती थी।

Jio के आने से पहले एक जीबी डेटा के लिए दो सौ तीन सौ रुपए पर माह लगते थे। मतलब ३३.३ एमबी प्रति दीन।लेकिन उस ज़माने के लिए यह काफ़ी था। क्योंकि तब शहरों में, घरों में, ऑफ़िस में वाइफ़ाई कॉमन हो गया था। और वाइफ़ाई की वजह से शहरों में यूटूब और सोशल मीडिया पर बहुत ग्रोथ पड़ गयी। इस अवसर को कैपिटलायज़ करने के लिए यूटूब पर कोमेदीयंस भी कांटेंट डालने लगे। उस समय कोमेदीयंस की पॉप्युलैरिटी बढ़ चुकी थी, उनमें ज़्यादातर अंग्रेज़ी कोमेदीयंस हैं, जैसे Kenny sebastian, Kanan Gill, Biswa और Daniel Fernandes। एक नए इंडस्ट्री खड़ी हो चुकी थी, और ये कोमेदीयंस उस इंडस्ट्री के लीडर्ज़ हैं।

इसके बाद आया हिंदी स्टैंडप कॉमडी का फ़ेज़। दो हज़ार सोलह में, इंटर्नेट और धीरे धीरे स्मार्ट फ़ोन, यूटूब और वहत्सऐप इंडिया के बड़े शहरों से लेकर दूर दूर के गाँव तक पहुँच गया था। २०११ के सेंसस के हिसाब से अंग्रेज़ी बोलने वाले लोग क़रीब १० प्रतिशत हैं, और उन दस प्रतिशत में सब को फलुअंटली अंग्रेज़ी बोलनी नहीं आती। दूसरी तरफ़ हिंदी बोलनेवाले लोग चवालीस प्रतिशत है, मतलब चार गुणा ज़्यादा। गूगल और केपीएमजी की रिपोर्ट के हिसाब से २०२१ तक इंडीयन भाषा में इंटर्नेट इस्तेमाल करने वाला लोग का संख्या ५३.६ करोड़ हो जाएगी। यह संख्या पूरे यूरोपाएन की आबादी से भी ज़्यादा बड़ा संख्या है।

यह सब डेटा और हिंदी बोलनेवाली ऑडीयन्स के आने का इम्पैक्ट समझने के लिए सबसे अच्छा उदाहरण है ज़ाकिर ख़ान। २०१६ में ज़ाकिर ख़ान ने एक विडीओ लॉंच किया जिसका शीर्षक था "When I met a Dehli girl."

Zakir Khan "When I met a Dehli girl". आज उस विडीओ पर ५ करोड़ से भी ज़्यादा व्यूज़ हैं। (पूरे देश में सिंगल लोग की संख्या इतनी बड़ी है।) देखिए दोस्तों, विडीओ का शीर्षक अंग्रेज़ी में हैं। यह अंग्रेज़ी स्टैंडप से हिंदी स्टैंडप का जो ट्रैंज़िशन है उसका काफ़ी बढ़िया मिसाल है। जो व्यूशिप अंग्रेज़ी कोमेदीयंस को दस सालों में मिली थी, उतनी व्यूशिप हिंदी कोमेदीयंस को सिर्फ़ तीन से चार साल में मिलती थी। भाषा और व्यूकाउंट के संबंध काफ़ी दिलचस्प है। क्योंकि अगर हम Kenny Sebastian की तुलना करें तो हम उनके यूटूब पेज पर सबसे ऊँचे व्यूकाउंट वाला विडीओ में १.१ करोड़ व्यूज़ हैं। और अभिषेक उपमन्यु की सबसे लोकप्रिय विडीओ पर ३ करोड़ व्यूज़ हैं।

और दोस्तों, अब अगर ग्रोथ के बारे में बात करें आनेवाला टाइम में, तो ज़्यादा लोग मानते हैं कि ग्रोथ अंग्रेज़ी में नहीं बल्कि क्षेत्रीय भाषा होनेवाली ऐसा लगता है। २०१६ में लॉंच हुआ मराठी स्टैंडप चैनल "भाडीपा" के पास आज क़रीब ९ लाख सब्सकरैबर्स हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

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